tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2003 पारण समय 06:39⁠–⁠17:44, बुध 11 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में निर्जला एकादशी 2003 कब है?

मंगलवार 10 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 10 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 11 जून

पारण समय
06:39–17:44
11 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 10 जून
  • 06:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 11 जून
  • 06:39–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में निर्जला एकादशी मंगल 10 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी मंगल 10 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:16 से 21:26 तक।

एकादशी 21:26 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 10 जून को सूर्योदय पर है, 06:39: मंगल 10 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:16 पर, उससे (05:03–06:39) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 11 जून, 06:39–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 10 जून 21:26 से बुध 11 जून 18:17 तक है; हरिवासर 02:39 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 11 जून को सूर्योदय (06:39) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:52 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।