tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में निर्जला एकादशी 2000 पारण समय 06:28⁠–⁠21:31, मंगल 13 जून

व्रत · समय UTC+5 में

Sevan में निर्जला एकादशी 2000 कब है?

सोमवार 12 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में सोम 12 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 13 जून

पारण समय
06:28–21:31
15 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 12 जून
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 13 जून
  • 06:28–21:31पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में निर्जला एकादशी सोम 12 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी सोम 12 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:47 रवि से 20:28 तक।

एकादशी 20:28 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 12 जून को सूर्योदय पर है, 06:28: सोम 12 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:47 रवि पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 13 जून, 06:28–21:31 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 12 जून 20:28 से मंगल 13 जून 21:39 तक है; हरिवासर 02:46 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 13 जून को सूर्योदय (06:28) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (21:31) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:29 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।