tithika
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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में निर्जला एकादशी 1997 पारण समय 09:45⁠–⁠21:32, मंगल 17 जून

व्रत · समय UTC+5 में

Sevan में निर्जला एकादशी 1997 कब है?

सोमवार 16 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में सोम 16 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 17 जून

पारण समय
09:45–21:32
11 घं 47 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 16 जून
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 17 जून
  • 09:45–21:32पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में निर्जला एकादशी सोम 16 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी सोम 16 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:49 से 03:43 मंगल तक।

एकादशी 03:43 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:49 सोम से 03:43 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 16 जून को सूर्योदय पर है, 06:28: सोम 16 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:49 पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 17 जून, 09:45–21:32 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 17 जून 03:43 से बुध 18 जून 03:52 तक है; हरिवासर 09:45 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (21:32) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।