tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 1940 शनि 15 जून या रवि 16 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में निर्जला एकादशी 1940 कब है?

स्मार्त

शनिवार 15 जून

वैष्णव

रविवार 16 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

Ipameri में शनि 15 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · रविवार 16 जून

पारण समय
08:45–17:45
9 घं 0 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · सोमवार 17 जून

पारण समय
06:41–17:45
11 घं 4 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शनिवार 15 जून
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 16 जून
  • 08:45–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • रविवार 16 जून
  • 06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 17 जून
  • 06:41–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में निर्जला एकादशी शनि 15 जून या रवि 16 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी शनि 15 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 16 जून को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:29 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:29 से 03:17 रवि तक।

एकादशी 03:17 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:29 शनि से 03:17 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 15 जून को सूर्योदय पर है, 06:40: शनि 15 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 15 जून को दशमी 05:29 तक है, अरुणोदय (05:04–06:40) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:17 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 16 जून को व्रत रखते हैं: रवि 16 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · रवि 16 जून, 08:45–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 16 जून 03:17 से सोम 17 जून 01:09 तक है; हरिवासर 08:45 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं।

वैष्णव · सोम 17 जून, 06:41–17:45 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी सोम 17 जून को 01:09 पर, रात में, अरुणोदय (05:05) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:41) से सूर्यास्त (17:45) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।