tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 1925 मंगल 2 जून या बुध 3 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में निर्जला एकादशी 1925 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 2 जून

वैष्णव

बुधवार 3 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

Ipameri में मंगल 2 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 3 जून

पारण समय
10:51–17:44
6 घं 53 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 4 जून

पारण समय
06:37–17:44
11 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 2 जून
  • 06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 3 जून
  • 10:51–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 3 जून
  • 06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 4 जून
  • 06:37–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में निर्जला एकादशी मंगल 2 जून या बुध 3 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी मंगल 2 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 3 जून को व्रत रखते हैं।

दशमी 06:17 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:17 से 05:18 बुध तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:18 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:17 मंगल से 05:18 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 2 जून को सूर्योदय पर है, 06:36: मंगल 2 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 2 जून को दशमी 06:17 तक है, अरुणोदय (05:00–06:36) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:18 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 3 जून को व्रत रखते हैं: बुध 3 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 3 जून, 10:51–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 3 जून 05:18 से गुरु 4 जून 03:32 तक है; हरिवासर 10:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:50 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 4 जून, 06:37–17:44 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 4 जून को 03:32 पर, रात में, अरुणोदय (05:01) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:37) से सूर्यास्त (17:44) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।