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Pāthardi, महाराष्ट्र में निर्जला एकादशी 1913 शनि 14 जून या रवि 15 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में निर्जला एकादशी 1913 कब है?

स्मार्त

शनिवार 14 जून

वैष्णव

रविवार 15 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

Pāthardi में शनि 14 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · रविवार 15 जून

पारण समय
09:08–19:07
9 घं 59 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · सोमवार 16 जून

पारण समय
05:51–19:08
13 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शनिवार 14 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 15 जून
  • 09:08–19:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • रविवार 15 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 16 जून
  • 05:51–19:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में निर्जला एकादशी शनि 14 जून या रवि 15 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी शनि 14 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 15 जून को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:12 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:12 से 03:31 रवि तक।

एकादशी 03:31 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:12 शनि से 03:31 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 14 जून को सूर्योदय पर है, 05:50: शनि 14 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 14 जून को दशमी 05:12 तक है, अरुणोदय (04:14–05:50) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:31 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 15 जून को व्रत रखते हैं: रवि 15 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · रवि 15 जून, 09:08–19:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 15 जून 03:31 से सोम 16 जून 02:01 तक है; हरिवासर 09:08 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · सोम 16 जून, 05:51–19:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी सोम 16 जून को 02:01 पर, रात में, अरुणोदय (04:15) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:51) से सूर्यास्त (19:08) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।