Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोक्षदा एकादशी 2049 शनि 4 दिसंबर या रवि 5 दिसंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में मोक्षदा एकादशी 2049 कब है?
स्मार्त
शनिवार 4 दिसंबर
वैष्णव
रविवार 5 दिसंबर
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
Ipameri में शनि 4 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 5 दिसंबर
वैष्णव · सोमवार 6 दिसंबर
मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 4 दिसंबर
-
05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 5 दिसंबर
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09:47–18:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 5 दिसंबर
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05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 दिसंबर
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05:29–18:38पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में मोक्षदा एकादशी शनि 4 दिसंबर या रवि 5 दिसंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोक्षदा एकादशी शनि 4 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 5 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:48 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:48 से 03:54 रवि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 03:54 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:48 शनि से 03:54 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 4 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:29: शनि 4 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 4 दिसंबर को दशमी 04:48 तक है, अरुणोदय (03:53–05:29) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:54 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 5 दिसंबर को व्रत रखते हैं: रवि 5 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 5 दिसंबर, 09:47–18:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 दिसंबर 03:54 से सोम 6 दिसंबर 03:24 तक है; हरिवासर 09:47 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:07 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 6 दिसंबर, 05:29–18:38 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 6 दिसंबर को 03:24 पर, रात में, अरुणोदय (03:53) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:29) से सूर्यास्त (18:38) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।