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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में मोक्षदा एकादशी 2021 पारण समय 08:16⁠–⁠17:34, बुध 15 दिसंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में मोक्षदा एकादशी 2021 कब है?

मंगलवार 14 दिसंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 14 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 15 दिसंबर

पारण समय
08:16–17:34
9 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 14 दिसंबर
  • 08:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 15 दिसंबर
  • 08:16–17:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोक्षदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में मोक्षदा एकादशी मंगल 14 दिसंबर को क्यों है?

मोक्षदा एकादशी मंगल 14 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:03 सोम से 22:06 तक।

एकादशी 22:06 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 14 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 08:15: मंगल 14 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:03 सोम पर, उससे (06:39–08:15) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 15 दिसंबर, 08:16–17:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 14 दिसंबर 22:06 से गुरु 16 दिसंबर 00:31 तक है; हरिवासर 04:42 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 15 दिसंबर को सूर्योदय (08:16) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:34) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:07 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।