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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में मोक्षदा एकादशी 2018 पारण समय 11:48⁠–⁠17:35, बुध 19 दिसंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में मोक्षदा एकादशी 2018 कब है?

मंगलवार 18 दिसंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 18 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 19 दिसंबर

पारण समय
11:48–17:35
5 घं 47 मि · Tithika की परिपाटी

मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 18 दिसंबर
  • 08:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 19 दिसंबर
  • 11:48–17:35पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोक्षदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में मोक्षदा एकादशी मंगल 18 दिसंबर को क्यों है?

मोक्षदा एकादशी मंगल 18 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:27 से 06:05 बुध तक।

एकादशी 06:05 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:27 मंगल से 06:05 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 18 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 08:17: मंगल 18 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 06:27 पर, उससे (06:41–08:17) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 19 दिसंबर, 11:48–17:35 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 19 दिसंबर 06:05 से गुरु 20 दिसंबर 04:56 तक है; हरिवासर 11:48 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:35) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:09 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।