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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोक्षदा एकादशी 2013 पारण समय 07:08⁠–⁠19:42, शुक्र 13 दिसंबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में मोक्षदा एकादशी 2013 कब है?

गुरुवार 12 दिसंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 12 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 13 दिसंबर

पारण समय
07:08–19:42
12 घं 34 मि · Tithika की परिपाटी

मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 12 दिसंबर
  • 06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 13 दिसंबर
  • 07:08–19:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोक्षदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोक्षदा एकादशी गुरु 12 दिसंबर को क्यों है?

मोक्षदा एकादशी गुरु 12 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:13 से 00:51 शुक्र तक।

एकादशी 00:51 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 12 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:31: गुरु 12 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:13 पर, उससे (04:55–06:31) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 13 दिसंबर, 07:08–19:42 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 13 दिसंबर 00:51 से शनि 14 दिसंबर 01:58 तक है; हरिवासर 07:08 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:42) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:09 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।