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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोक्षदा एकादशी 2003 पारण समय 06:29⁠–⁠10:33, शुक्र 5 दिसंबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में मोक्षदा एकादशी 2003 कब है?

गुरुवार 4 दिसंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 4 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 5 दिसंबर

पारण समय
06:29–10:33
4 घं 4 मि

मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 4 दिसंबर
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 5 दिसंबर
  • 06:29–10:33पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंमोक्षदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोक्षदा एकादशी गुरु 4 दिसंबर को क्यों है?

मोक्षदा एकादशी गुरु 4 दिसंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:57 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:57 से 08:04 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:57 बुध से 08:04 तक।

द्वादशी: 08:04 गुरु से 10:33 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 3 दिसंबर को 06:28 और गुरु 4 दिसंबर को 06:29। एकादशी (बुध 3 दिसंबर 05:57 से गुरु 4 दिसंबर 08:04 तक) और द्वादशी (गुरु 4 दिसंबर 08:04 से शुक्र 5 दिसंबर 10:33 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 4 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 3 दिसंबर को दशमी 05:57 तक है, उसके भीतर (04:52–06:28); गुरु 4 दिसंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 5 दिसंबर, 06:29–10:33

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 4 दिसंबर 08:04 से शुक्र 5 दिसंबर 10:33 तक है; हरिवासर 14:41 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 5 दिसंबर को सूर्योदय (06:29) से होता है।

नियम

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।