Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोक्षदा एकादशी 1998 रवि 29 नवंबर या सोम 30 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में मोक्षदा एकादशी 1998 कब है?
स्मार्त
रविवार 29 नवंबर
वैष्णव
सोमवार 30 नवंबर
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
Ipameri में रवि 29 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 30 नवंबर
वैष्णव · मंगलवार 1 दिसंबर
मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 29 नवंबर
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06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 30 नवंबर
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08:33–19:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 30 नवंबर
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06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 1 दिसंबर
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06:28–19:35पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में मोक्षदा एकादशी रवि 29 नवंबर या सोम 30 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोक्षदा एकादशी रवि 29 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 30 नवंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:07 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:07 से 03:22 सोम तक।
एकादशी 03:22 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:07 रवि से 03:22 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 29 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:28: रवि 29 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 29 नवंबर को दशमी 06:07 तक है, अरुणोदय (04:52–06:28) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:22 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 30 नवंबर को व्रत रखते हैं: सोम 30 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 30 नवंबर, 08:33–19:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 30 नवंबर 03:22 से मंगल 1 दिसंबर 00:09 तक है; हरिवासर 08:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:34) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:05 तक, करते हैं।
वैष्णव · मंगल 1 दिसंबर, 06:28–19:35 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 1 दिसंबर को 00:09 पर, रात में, अरुणोदय (04:52) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:28) से सूर्यास्त (19:35) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।