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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोक्षदा एकादशी 1949 1949 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोक्षदा एकादशी 1949 कब है?

1949 में दो बार

बुधवार 30 नवंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 30 नवंबर का पूरा पंचांग

बुधवार 30 नवंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 30 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 1 दिसंबर

पारण समय
11:12–19:35
8 घं 23 मि · Tithika की परिपाटी

गुरुवार 1 दिसंबर

पारण समय
11:12–19:35
8 घं 23 मि · Tithika की परिपाटी

मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

बुध 30 नवंबर

  • 05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 1 दिसंबर
  • 11:12–19:35पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

बुध 30 नवंबर

  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • 11:12–19:35पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोक्षदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

मोक्षदा एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

बुध 30 नवंबर क्यों?

मोक्षदा एकादशी बुध 30 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:46 से 04:31 गुरु तक।

एकादशी 04:31 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:46 से 04:31 गुरु तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 30 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:28: बुध 30 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:46 पर, उससे (03:52–05:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 30 नवंबर, 11:12 गुरु–19:35 गुरु (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 30 नवंबर 04:31 से शुक्र 2 दिसंबर 07:12 तक है; हरिवासर 11:12 गुरु पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:35 गुरु) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:05 गुरु तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

बुध 30 नवंबर क्यों?

मोक्षदा एकादशी बुध 30 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:46 से 04:31 गुरु तक।

एकादशी 04:31 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:46 से 04:31 गुरु तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 30 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:28: बुध 30 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:46 पर, उससे (03:52–05:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 30 नवंबर, 11:12 गुरु–19:35 गुरु (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 30 नवंबर 04:31 से शुक्र 2 दिसंबर 07:12 तक है; हरिवासर 11:12 गुरु पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:35 गुरु) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:05 गुरु तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।