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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोक्षदा एकादशी 1908 पारण समय 05:29⁠–⁠18:37, शुक्र 4 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोक्षदा एकादशी 1908 कब है?

गुरुवार 3 दिसंबर

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 3 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 4 दिसंबर

पारण समय
05:29–18:37
13 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

मोक्षदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 3 दिसंबर
  • 05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 4 दिसंबर
  • 05:29–18:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोक्षदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोक्षदा एकादशी गुरु 3 दिसंबर को क्यों है?

मोक्षदा एकादशी गुरु 3 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:23 से 23:27 तक।

एकादशी 23:27 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 3 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:22: गुरु 3 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:23 पर, उससे (03:46–05:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 4 दिसंबर, 05:29–18:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 3 दिसंबर 23:27 से शुक्र 4 दिसंबर 21:44 तक है; हरिवासर 05:01 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 4 दिसंबर को सूर्योदय (05:22) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:30) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:00 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।