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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 2078 पारण समय 06:33⁠–⁠10:15, सोम 23 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 2078 कब है?

रविवार 22 मई

वैशाख शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 22 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 23 मई

पारण समय
06:33–10:15
3 घं 42 मि

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 22 मई
  • 06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 23 मई
  • 06:33–10:15पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी रवि 22 मई को क्यों है?

मोहिनी एकादशी रवि 22 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:17 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:17 से 07:41 रवि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:17 शनि से 07:41 तक।

द्वादशी: 07:41 रवि से 10:15 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 21 मई को 06:32 और रवि 22 मई को 06:33। एकादशी (शनि 21 मई 05:17 से रवि 22 मई 07:41 तक) और द्वादशी (रवि 22 मई 07:41 से सोम 23 मई 10:15 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 22 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शनि 21 मई को दशमी 05:17 तक है, उसके भीतर (04:56–06:32); रवि 22 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 23 मई, 06:33–10:15

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 22 मई 07:41 से सोम 23 मई 10:15 तक है; हरिवासर 14:19 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 23 मई को सूर्योदय (06:33) से होता है।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।