Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 2057 सोम 14 मई या मंगल 15 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में मोहिनी एकादशी 2057 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 15 मई
वैष्णव · बुधवार 16 मई
मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 14 मई
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06:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 15 मई
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09:39–17:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 15 मई
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06:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 16 मई
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06:31–17:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में मोहिनी एकादशी सोम 14 मई या मंगल 15 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोहिनी एकादशी सोम 14 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव मंगल 15 मई को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:48 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 से 04:13 मंगल तक।
एकादशी 04:13 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:48 सोम से 04:13 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 14 मई को सूर्योदय पर है, 06:30: सोम 14 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 14 मई को दशमी 05:48 तक है, अरुणोदय (04:54–06:30) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:13 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव मंगल 15 मई को व्रत रखते हैं: मंगल 15 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 15 मई, 09:39–17:47 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 15 मई 04:13 से बुध 16 मई 01:55 तक है; हरिवासर 09:39 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:46 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 16 मई, 06:31–17:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 16 मई को 01:55 पर, रात में, अरुणोदय (04:55) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:31) से सूर्यास्त (17:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।