Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 2037 शनि 25 अप्रैल या रवि 26 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में मोहिनी एकादशी 2037 कब है?
स्मार्त
शनिवार 25 अप्रैल
वैष्णव
रविवार 26 अप्रैल
वैशाख शुक्ल एकादशी
Ipameri में शनि 25 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 26 अप्रैल
वैष्णव · सोमवार 27 अप्रैल
मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 25 अप्रैल
-
06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 26 अप्रैल
-
09:12–17:56पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 26 अप्रैल
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06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 27 अप्रैल
-
06:25–17:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में मोहिनी एकादशी शनि 25 अप्रैल या रवि 26 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोहिनी एकादशी शनि 25 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 26 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:45 से। एकादशी: 06:45 से 03:57 रवि तक।
एकादशी 03:57 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:45 शनि से 03:57 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 25 अप्रैल को 06:45 पर, उस सूर्योदय (06:24) के बाद, लगती है और रवि 26 अप्रैल को 03:57 पर, अगले सूर्योदय (06:24 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 25 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 25 अप्रैल को अरुणोदय (04:48–06:24) में दशमी है। रवि 26 अप्रैल को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:57 तक, फिर द्वादशी): रवि 26 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 26 अप्रैल, 09:12–17:56 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 26 अप्रैल 03:57 से सोम 27 अप्रैल 00:56 तक है; हरिवासर 09:12 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:56) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 27 अप्रैल, 06:25–17:55 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 27 अप्रैल को 00:56 पर, रात में, अरुणोदय (04:49) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:25) से सूर्यास्त (17:55) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।