Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 2028 गुरु 4 मई या शुक्र 5 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में मोहिनी एकादशी 2028 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 5 मई
वैष्णव · शनिवार 6 मई
मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 4 मई
-
06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 5 मई
-
08:22–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 5 मई
-
06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 6 मई
-
06:27–17:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में मोहिनी एकादशी गुरु 4 मई या शुक्र 5 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोहिनी एकादशी गुरु 4 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 5 मई को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:43 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:43 से 03:03 शुक्र तक।
एकादशी 03:03 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:43 गुरु से 03:03 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 4 मई को सूर्योदय पर है, 06:27: गुरु 4 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 4 मई को दशमी 05:43 तक है, अरुणोदय (04:51–06:27) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:03 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 5 मई को व्रत रखते हैं: शुक्र 5 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 5 मई, 08:22–17:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 5 मई 03:03 से शनि 6 मई 00:18 तक है; हरिवासर 08:22 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं।
वैष्णव · शनि 6 मई, 06:27–17:50 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 6 मई को 00:18 पर, रात में, अरुणोदय (04:51) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:27) से सूर्यास्त (17:50) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।