दिफ्फा, नाइजर में मोहिनी एकादशी 2021 शनि 22 मई या रवि 23 मई
व्रत · समय WAT में
दिफ्फा में मोहिनी एकादशी 2021 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 23 मई
वैष्णव · सोमवार 24 मई
मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 22 मई
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05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 23 मई
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07:27–18:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 23 मई
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05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 24 मई
-
05:42–18:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
दिफ्फा में मोहिनी एकादशी शनि 22 मई या रवि 23 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोहिनी एकादशी शनि 22 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 23 मई को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:46 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:46 से 02:13 रवि तक।
एकादशी 02:13 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:46 शनि से 02:13 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 22 मई को सूर्योदय पर है, 05:42: शनि 22 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 22 मई को दशमी 04:46 तक है, अरुणोदय (04:06–05:42) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:13 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 23 मई को व्रत रखते हैं: रवि 23 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 23 मई, 07:27–18:30 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 23 मई 02:13 से रवि 23 मई 23:09 तक है; हरिवासर 07:27 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:30) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।
वैष्णव · सोम 24 मई, 05:42–18:30 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 24 मई को 23:09 रवि पर, रात में, अरुणोदय (04:06) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:42) से सूर्यास्त (18:30) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
वैशाख शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।