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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 2016 पारण समय 06:31⁠–⁠11:22, बुध 18 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 2016 कब है?

मंगलवार 17 मई

वैशाख शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 17 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 18 मई

पारण समय
06:31–11:22
4 घं 51 मि

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 17 मई
  • 06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 18 मई
  • 06:31–11:22पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी मंगल 17 मई को क्यों है?

मोहिनी एकादशी मंगल 17 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:20 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:20 से 08:47 मंगल तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:20 सोम से 08:47 तक।

द्वादशी: 08:47 मंगल से 11:22 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, सोम 16 मई को 06:31 और मंगल 17 मई को 06:31। एकादशी (सोम 16 मई 06:20 से मंगल 17 मई 08:47 तक) और द्वादशी (मंगल 17 मई 08:47 से बुध 18 मई 11:22 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: मंगल 17 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: सोम 16 मई को दशमी 06:20 तक है, उसके भीतर (04:55–06:31); मंगल 17 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 18 मई, 06:31–11:22

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 17 मई 08:47 से बुध 18 मई 11:22 तक है; हरिवासर 15:26 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 18 मई को सूर्योदय (06:31) से होता है।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।