tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 2004 पारण समय 08:45⁠–⁠17:53, शनि 1 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 2004 कब है?

शुक्रवार 30 अप्रैल

वैशाख शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 30 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 1 मई

पारण समय
08:45–17:53
9 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 30 अप्रैल
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 1 मई
  • 08:45–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी शुक्र 30 अप्रैल को क्यों है?

मोहिनी एकादशी शुक्र 30 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:56 से 03:08 शनि तक।

एकादशी 03:08 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:56 शुक्र से 03:08 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 30 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:25: शुक्र 30 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:56 पर, उससे (04:49–06:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 1 मई, 08:45–17:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 1 मई 03:08 से रवि 2 मई 01:36 तक है; हरिवासर 08:45 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।