tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 1942 रवि 26 अप्रैल या सोम 27 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 1942 कब है?

स्मार्त

रविवार 26 अप्रैल

वैष्णव

सोमवार 27 अप्रैल

वैशाख शुक्ल एकादशी

Ipameri में रवि 26 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 27 अप्रैल

पारण समय
10:10–17:55
7 घं 45 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 28 अप्रैल

पारण समय
06:24–17:55
11 घं 31 मि · Tithika की परिपाटी

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 26 अप्रैल
  • 06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 27 अप्रैल
  • 10:10–17:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 27 अप्रैल
  • 06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 28 अप्रैल
  • 06:24–17:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी रवि 26 अप्रैल या सोम 27 अप्रैल को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में मोहिनी एकादशी रवि 26 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 27 अप्रैल को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:08 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:08 से 04:31 सोम तक।

एकादशी 04:31 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:08 रवि से 04:31 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 26 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:24: रवि 26 अप्रैल।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 26 अप्रैल को दशमी 05:08 तक है, अरुणोदय (04:48–06:24) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:31 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 27 अप्रैल को व्रत रखते हैं: सोम 27 अप्रैल।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 27 अप्रैल, 10:10–17:55 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 27 अप्रैल 04:31 से मंगल 28 अप्रैल 03:06 तक है; हरिवासर 10:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:55) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · मंगल 28 अप्रैल, 06:24–17:55 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 28 अप्रैल को 03:06 पर, रात में, अरुणोदय (04:48) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:24) से सूर्यास्त (17:55) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।