tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 1940 पारण समय 06:31⁠–⁠17:46, शनि 18 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 1940 कब है?

शुक्रवार 17 मई

वैशाख शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 17 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 18 मई

पारण समय
06:31–17:46
11 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 17 मई
  • 06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 18 मई
  • 06:31–17:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी शुक्र 17 मई को क्यों है?

मोहिनी एकादशी शुक्र 17 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:07 से 21:26 तक।

एकादशी 21:26 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 17 मई को सूर्योदय पर है, 06:31: शुक्र 17 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:07 पर, उससे (04:55–06:31) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 18 मई, 06:31–17:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 17 मई 21:26 से शनि 18 मई 18:38 तक है; हरिवासर 02:44 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 18 मई को सूर्योदय (06:31) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:46 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।