tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 1908 पारण समय 09:05⁠–⁠17:48, मंगल 12 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 1908 कब है?

सोमवार 11 मई

वैशाख शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 11 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 12 मई

पारण समय
09:05–17:48
8 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 11 मई
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 12 मई
  • 09:05–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी सोम 11 मई को क्यों है?

मोहिनी एकादशी सोम 11 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:35 से 02:50 मंगल तक।

एकादशी 02:50 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:35 सोम से 02:50 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 11 मई को सूर्योदय पर है, 06:22: सोम 11 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:35 पर, उससे (04:46–06:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 12 मई, 09:05–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 12 मई 02:50 से बुध 13 मई 03:25 तक है; हरिवासर 08:59 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:42) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:38 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।