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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में मोहिनी एकादशी 1900 पारण समय 06:28⁠–⁠08:46, शुक्र 11 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में मोहिनी एकादशी 1900 कब है?

गुरुवार 10 मई

वैशाख शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 10 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 11 मई

पारण समय
06:28–08:46
2 घं 18 मि

मोहिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 10 मई
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 11 मई
  • 06:28–08:46पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंमोहिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में मोहिनी एकादशी गुरु 10 मई को क्यों है?

मोहिनी एकादशी गुरु 10 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:15 से 06:35 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:15 बुध से 06:35 तक।

द्वादशी: 06:35 गुरु से 08:40 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 9 मई को 06:21 और गुरु 10 मई को 06:22। एकादशी (बुध 9 मई 04:15 से गुरु 10 मई 06:35 तक) और द्वादशी (गुरु 10 मई 06:35 से शुक्र 11 मई 08:40 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 10 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 11 मई, 06:28–08:46

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 10 मई 06:35 से शुक्र 11 मई 08:40 तक है; हरिवासर 13:06 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 11 मई को सूर्योदय (06:22) से होता है।

नियम

वैशाख शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।