Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में कामिका एकादशी 2027 गुरु 29 जुलाई या शुक्र 30 जुलाई
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में कामिका एकादशी 2027 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 29 जुलाई
वैष्णव
शुक्रवार 30 जुलाई
श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में गुरु 29 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 30 जुलाई
वैष्णव · शनिवार 31 जुलाई
कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 29 जुलाई
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05:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 30 जुलाई
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08:59–20:17पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 30 जुलाई
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05:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 31 जुलाई
-
05:55–20:16पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में कामिका एकादशी गुरु 29 जुलाई या शुक्र 30 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामिका एकादशी गुरु 29 जुलाई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 30 जुलाई को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:04 से। एकादशी: 06:04 से 03:43 शुक्र तक।
एकादशी 03:43 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:04 गुरु से 03:43 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 29 जुलाई को 06:04 पर, उस सूर्योदय (05:53) के बाद, लगती है और शुक्र 30 जुलाई को 03:43 पर, अगले सूर्योदय (05:54 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 29 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 29 जुलाई को अरुणोदय (04:17–05:53) में दशमी है। शुक्र 30 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:43 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 30 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 30 जुलाई, 08:59–20:17 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 30 जुलाई 03:43 से शनि 31 जुलाई 00:48 तक है; हरिवासर 08:59 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:17) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:47 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 31 जुलाई, 05:55–20:16 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 31 जुलाई को 00:48 पर, रात में, अरुणोदय (04:19) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:55) से सूर्यास्त (20:16) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।