Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 2021 पारण समय 06:37–08:39, गुरु 5 अगस्त
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में कामिका एकादशी 2021 कब है?
बुधवार 4 अगस्त
श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 4 अगस्त का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 5 अगस्त
कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण
- बुधवार 4 अगस्त
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06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 5 अगस्त
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06:37–08:39पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में कामिका एकादशी बुध 4 अगस्त को क्यों है?
कामिका एकादशी बुध 4 अगस्त को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:30 से 06:47 बुध तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:30 मंगल से 06:47 तक।
द्वादशी: 06:47 बुध से 08:39 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 3 अगस्त को 06:38 और बुध 4 अगस्त को 06:37। एकादशी (मंगल 3 अगस्त 04:30 से बुध 4 अगस्त 06:47 तक) और द्वादशी (बुध 4 अगस्त 06:47 से गुरु 5 अगस्त 08:39 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 4 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 5 अगस्त, 06:37–08:39
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 4 अगस्त 06:47 से गुरु 5 अगस्त 08:39 तक है; हरिवासर 13:15 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 5 अगस्त को सूर्योदय (06:37) से होता है।
नियम
श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।