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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में कामिका एकादशी 2020 पारण समय 05:44⁠–⁠20:27, शुक्र 17 जुलाई

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में कामिका एकादशी 2020 कब है?

गुरुवार 16 जुलाई

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 16 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 17 जुलाई

पारण समय
05:44–20:27
14 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 16 जुलाई
  • 05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 17 जुलाई
  • 05:44–20:27पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामिका एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में कामिका एकादशी गुरु 16 जुलाई को क्यों है?

कामिका एकादशी गुरु 16 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:50 बुध से 22:15 तक।

एकादशी 22:15 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 16 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:43: गुरु 16 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:50 बुध पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 17 जुलाई, 05:44–20:27 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 16 जुलाई 22:15 से शुक्र 17 जुलाई 23:03 तक है; हरिवासर 04:27 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 17 जुलाई को सूर्योदय (05:44) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:27) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:40 तक, करते हैं।

नियम

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।