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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 2013 पारण समय 06:38⁠–⁠12:33, शनि 3 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामिका एकादशी 2013 कब है?

शुक्रवार 2 अगस्त

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 2 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 3 अगस्त

पारण समय
06:38–12:33
5 घं 55 मि

कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 2 अगस्त
  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 3 अगस्त
  • 06:38–12:33पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंकामिका एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामिका एकादशी शुक्र 2 अगस्त को क्यों है?

कामिका एकादशी शुक्र 2 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:32 से। एकादशी: 07:32 से 10:02 शुक्र तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:32 गुरु से 10:02 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 2 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:38: शुक्र 2 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 07:32 गुरु पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 3 अगस्त, 06:38–12:33

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 2 अगस्त 10:02 से शनि 3 अगस्त 12:33 तक है; हरिवासर 16:40 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 3 अगस्त को सूर्योदय (06:38) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं।

नियम

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।