tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 2001 पारण समय 08:51⁠–⁠17:54, मंगल 17 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामिका एकादशी 2001 कब है?

सोमवार 16 जुलाई

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 16 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 17 जुलाई

पारण समय
08:51–17:54
9 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 16 जुलाई
  • 06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 17 जुलाई
  • 08:51–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामिका एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामिका एकादशी सोम 16 जुलाई को क्यों है?

कामिका एकादशी सोम 16 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:23 से 03:18 मंगल तक।

एकादशी 03:18 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:23 सोम से 03:18 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 16 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:43: सोम 16 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:23 पर, उससे (05:07–06:43) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 17 जुलाई, 08:51–17:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 17 जुलाई 03:18 से बुध 18 जुलाई 01:30 तक है; हरिवासर 08:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।

नियम

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।