tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 1997 पारण समय 07:09⁠–⁠17:58, बुध 30 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामिका एकादशी 1997 कब है?

मंगलवार 29 जुलाई

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 29 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 30 जुलाई

पारण समय
07:09–17:58
10 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 29 जुलाई
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 30 जुलाई
  • 07:09–17:58पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामिका एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामिका एकादशी मंगल 29 जुलाई को क्यों है?

कामिका एकादशी मंगल 29 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:09 से 01:03 बुध तक।

एकादशी 01:03 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 29 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:40: मंगल 29 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:09 पर, उससे (05:04–06:40) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 30 जुलाई, 07:09–17:58 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 30 जुलाई 01:03 से गुरु 31 जुलाई 01:26 तक है; हरिवासर 07:09 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:58) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:55 तक, करते हैं।

नियम

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।