tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 1964 सोम 3 अगस्त या मंगल 4 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामिका एकादशी 1964 कब है?

स्मार्त

सोमवार 3 अगस्त

वैष्णव

मंगलवार 4 अगस्त

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में सोम 3 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 4 अगस्त

पारण समय
09:30–17:59
8 घं 30 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 5 अगस्त

पारण समय
06:37–18:00
11 घं 23 मि · Tithika की परिपाटी

कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 3 अगस्त
  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 4 अगस्त
  • 09:30–17:59पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 4 अगस्त
  • 06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 5 अगस्त
  • 06:37–18:00पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामिका एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामिका एकादशी सोम 3 अगस्त या मंगल 4 अगस्त को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामिका एकादशी सोम 3 अगस्त को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 4 अगस्त को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:59 से। एकादशी: 06:59 से 04:14 मंगल तक।

एकादशी 04:14 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:59 सोम से 04:14 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 3 अगस्त को 06:59 पर, उस सूर्योदय (06:38) के बाद, लगती है और मंगल 4 अगस्त को 04:14 पर, अगले सूर्योदय (06:37 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 3 अगस्त।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 3 अगस्त को अरुणोदय (05:02–06:38) में दशमी है। मंगल 4 अगस्त को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:14 तक, फिर द्वादशी): मंगल 4 अगस्त।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 4 अगस्त, 09:30–17:59 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 4 अगस्त 04:14 से बुध 5 अगस्त 01:16 तक है; हरिवासर 09:30 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:59) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 5 अगस्त, 06:37–18:00 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 5 अगस्त को 01:16 पर, रात में, अरुणोदय (05:01) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:37) से सूर्यास्त (18:00) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।