tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 1920 पारण समय 06:43⁠–⁠17:52, मंगल 13 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामिका एकादशी 1920 कब है?

सोमवार 12 जुलाई

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 12 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 13 जुलाई

पारण समय
06:43–17:52
11 घं 9 मि · Tithika की परिपाटी

कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 12 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 13 जुलाई
  • 06:43–17:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामिका एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामिका एकादशी सोम 12 जुलाई को क्यों है?

कामिका एकादशी सोम 12 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 10:09 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 10:09 रवि से 07:31 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 12 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:44: सोम 12 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 10:09 रवि पर, उससे (05:08–06:44) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 13 जुलाई, 06:43–17:52 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 13 जुलाई को 04:23 पर, रात में, अरुणोदय (05:07) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:43) से सूर्यास्त (17:52) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।