Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामिका एकादशी 1902 बुध 30 जुलाई या गुरु 31 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में कामिका एकादशी 1902 कब है?
स्मार्त
बुधवार 30 जुलाई
वैष्णव
गुरुवार 31 जुलाई
श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 30 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 31 जुलाई
वैष्णव · शुक्रवार 1 अगस्त
कामिका एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 30 जुलाई
-
06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 31 जुलाई
-
11:12–17:58पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 31 जुलाई
-
06:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 1 अगस्त
-
06:39–17:58पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में कामिका एकादशी बुध 30 जुलाई या गुरु 31 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामिका एकादशी बुध 30 जुलाई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव गुरु 31 जुलाई को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:44 से। एकादशी: 08:44 से 05:52 गुरु तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:52 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:44 बुध से 05:52 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह बुध 30 जुलाई को 08:44 पर, उस सूर्योदय (06:33) के बाद, लगती है और गुरु 31 जुलाई को 05:52 पर, अगले सूर्योदय (06:33 गुरु) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: बुध 30 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 30 जुलाई को अरुणोदय (04:57–06:33) में दशमी है। गुरु 31 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:52 तक, फिर द्वादशी): गुरु 31 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 31 जुलाई, 11:12–17:58 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 31 जुलाई 05:52 से शुक्र 1 अगस्त 02:45 तक है; हरिवासर 11:06 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:49 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 1 अगस्त, 06:39–17:58 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 1 अगस्त को 02:45 पर, रात में, अरुणोदय (04:56) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:32) से सूर्यास्त (17:52) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
श्रावण कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आषाढ़ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।