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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 2067 रवि 24 अप्रैल या सोम 25 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामदा एकादशी 2067 कब है?

स्मार्त

रविवार 24 अप्रैल

वैष्णव

सोमवार 25 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

Ipameri में रवि 24 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 25 अप्रैल

पारण समय
12:27–17:56
5 घं 29 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 26 अप्रैल

पारण समय
06:24–07:03
39 मि

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 24 अप्रैल
  • 06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 25 अप्रैल
  • 12:27–17:56पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 25 अप्रैल
  • 06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 26 अप्रैल
  • 06:24–07:03पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामदा एकादशी रवि 24 अप्रैल या सोम 25 अप्रैल को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी रवि 24 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 25 अप्रैल को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:51 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:51 से 06:16 सोम तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:16 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:51 रवि से 06:16 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 24 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:24: रवि 24 अप्रैल।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 24 अप्रैल को दशमी 04:51 तक है, अरुणोदय (04:48–06:24) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:16 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 25 अप्रैल को व्रत रखते हैं: सोम 25 अप्रैल।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 25 अप्रैल, 12:27–17:56 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 25 अप्रैल 06:16 से मंगल 26 अप्रैल 07:03 तक है; हरिवासर 12:27 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:56) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · मंगल 26 अप्रैल, 06:24–07:03

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 25 अप्रैल 06:16 से मंगल 26 अप्रैल 07:03 तक है; हरिवासर 12:27 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 26 अप्रैल को सूर्योदय (06:24) से होता है।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।