Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में कामदा एकादशी 2028 बुध 5 अप्रैल या गुरु 6 अप्रैल
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में कामदा एकादशी 2028 कब है?
स्मार्त
बुधवार 5 अप्रैल
वैष्णव
गुरुवार 6 अप्रैल
चैत्र शुक्ल एकादशी
Sevan में बुध 5 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 6 अप्रैल
वैष्णव · शुक्रवार 7 अप्रैल
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 5 अप्रैल
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06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 6 अप्रैल
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08:42–19:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 6 अप्रैल
-
06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 7 अप्रैल
-
06:33–19:31पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में कामदा एकादशी बुध 5 अप्रैल या गुरु 6 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी बुध 5 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 6 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:16 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:16 से 03:28 गुरु तक।
एकादशी 03:28 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:16 बुध से 03:28 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 5 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:36: बुध 5 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 5 अप्रैल को दशमी 06:16 तक है, अरुणोदय (05:00–06:36) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:28 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 6 अप्रैल को व्रत रखते हैं: गुरु 6 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 6 अप्रैल, 08:42–19:30 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 6 अप्रैल 03:28 से शुक्र 7 अप्रैल 00:22 तक है; हरिवासर 08:42 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:30) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:10 तक, करते हैं।
वैष्णव · शुक्र 7 अप्रैल, 06:33–19:31 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 7 अप्रैल को 00:22 पर, रात में, अरुणोदय (04:57) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:33) से सूर्यास्त (19:31) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।