Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में कामदा एकादशी 2026 शनि 28 मार्च या रवि 29 मार्च
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में कामदा एकादशी 2026 कब है?
स्मार्त
शनिवार 28 मार्च
वैष्णव
रविवार 29 मार्च
चैत्र शुक्ल एकादशी
Sevan में शनि 28 मार्च का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 29 मार्च
वैष्णव · सोमवार 30 मार्च
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 28 मार्च
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06:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 29 मार्च
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12:07–19:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 29 मार्च
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06:49व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 30 मार्च
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05:11–05:40पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में कामदा एकादशी शनि 28 मार्च या रवि 29 मार्च को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी शनि 28 मार्च को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 29 मार्च को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:16 से। एकादशी: 07:16 से 06:16 रवि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:16 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:16 शनि से 06:16 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 28 मार्च को 07:16 पर, उस सूर्योदय (06:50) के बाद, लगती है और रवि 29 मार्च को 06:16 पर, अगले सूर्योदय (06:49 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 28 मार्च।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 28 मार्च को अरुणोदय (05:14–06:50) में दशमी है। रवि 29 मार्च को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 06:16 तक, फिर द्वादशी): रवि 29 मार्च।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 29 मार्च, 12:07–19:21 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 29 मार्च 06:16 से सोम 30 मार्च 05:40 तक है; हरिवासर 12:07 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:21) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:19 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 30 मार्च, 05:11–05:40 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 30 मार्च को 05:40 पर, अरुणोदय (05:11) लगने के बाद और सूर्योदय (06:47) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।