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Pāthardi, महाराष्ट्र में कामदा एकादशी 2021 पारण समय 06:05⁠–⁠18:49, शनि 24 अप्रैल

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में कामदा एकादशी 2021 कब है?

शुक्रवार 23 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में शुक्र 23 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 24 अप्रैल

पारण समय
06:05–18:49
12 घं 44 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 23 अप्रैल
  • 06:06व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 24 अप्रैल
  • 06:05–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में कामदा एकादशी शुक्र 23 अप्रैल को क्यों है?

कामदा एकादशी शुक्र 23 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:35 गुरु से 21:48 तक।

एकादशी 21:48 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 23 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:06: शुक्र 23 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:35 गुरु पर, उससे (04:30–06:06) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 24 अप्रैल, 06:05–18:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 23 अप्रैल 21:48 से शनि 24 अप्रैल 19:17 तक है; हरिवासर 03:10 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 24 अप्रैल को सूर्योदय (06:05) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:38 तक, करते हैं।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।