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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में कामदा एकादशी 2016 पारण समय 06:16⁠–⁠19:42, सोम 18 अप्रैल

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में कामदा एकादशी 2016 कब है?

रविवार 17 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में रवि 17 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 18 अप्रैल

पारण समय
06:16–19:42
13 घं 26 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 17 अप्रैल
  • 06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 18 अप्रैल
  • 06:16–19:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में कामदा एकादशी रवि 17 अप्रैल को क्यों है?

कामदा एकादशी रवि 17 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:48 शनि से 23:36 तक।

एकादशी 23:36 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 17 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:18: रवि 17 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:48 शनि पर, उससे (04:42–06:18) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 18 अप्रैल, 06:16–19:42 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 17 अप्रैल 23:36 से मंगल 19 अप्रैल 01:49 तक है; हरिवासर 06:09 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 18 अप्रैल को सूर्योदय (06:16) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:42) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।