tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 2012 सोम 2 अप्रैल या मंगल 3 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामदा एकादशी 2012 कब है?

स्मार्त

सोमवार 2 अप्रैल

वैष्णव

मंगलवार 3 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

Ipameri में सोम 2 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 3 अप्रैल

पारण समय
09:21–18:12
8 घं 51 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 4 अप्रैल

पारण समय
06:19–18:11
11 घं 52 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 2 अप्रैल
  • 06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 3 अप्रैल
  • 09:21–18:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 3 अप्रैल
  • 06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 4 अप्रैल
  • 06:19–18:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामदा एकादशी सोम 2 अप्रैल या मंगल 3 अप्रैल को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी सोम 2 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव मंगल 3 अप्रैल को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:11 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:11 से 03:53 मंगल तक।

एकादशी 03:53 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:11 सोम से 03:53 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 2 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:19: सोम 2 अप्रैल।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 2 अप्रैल को दशमी 05:11 तक है, अरुणोदय (04:43–06:19) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:53 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव मंगल 3 अप्रैल को व्रत रखते हैं: मंगल 3 अप्रैल।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 3 अप्रैल, 09:21–18:12 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 3 अप्रैल 03:53 से बुध 4 अप्रैल 01:48 तक है; हरिवासर 09:21 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:12) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 4 अप्रैल, 06:19–18:11 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 4 अप्रैल को 01:48 पर, रात में, अरुणोदय (04:43) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:19) से सूर्यास्त (18:11) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।