tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 2007 पारण समय 11:41⁠–⁠18:16, गुरु 29 मार्च

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामदा एकादशी 2007 कब है?

बुधवार 28 मार्च

चैत्र शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 28 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 29 मार्च

पारण समय
11:41–18:16
6 घं 35 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 28 मार्च
  • 06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 29 मार्च
  • 11:41–18:16पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामदा एकादशी बुध 28 मार्च को क्यों है?

कामदा एकादशी बुध 28 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:52 से 05:13 गुरु तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:13 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:52 बुध से 05:13 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 28 मार्च को सूर्योदय पर है, 06:18: बुध 28 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:52 पर, उससे (04:42–06:18) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 29 मार्च, 11:41–18:16 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 29 मार्च 05:13 से शुक्र 30 मार्च 07:03 तक है; हरिवासर 11:41 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:16) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।