tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 2003 शनि 12 अप्रैल या रवि 13 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामदा एकादशी 2003 कब है?

स्मार्त

शनिवार 12 अप्रैल

वैष्णव

रविवार 13 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

Ipameri में शनि 12 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · रविवार 13 अप्रैल

पारण समय
10:58–18:05
7 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · सोमवार 14 अप्रैल

पारण समय
06:21–18:04
11 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शनिवार 12 अप्रैल
  • 06:21व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 13 अप्रैल
  • 10:58–18:05पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • रविवार 13 अप्रैल
  • 06:21व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 14 अप्रैल
  • 06:21–18:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामदा एकादशी शनि 12 अप्रैल या रवि 13 अप्रैल को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी शनि 12 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 13 अप्रैल को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:31 से। एकादशी: 07:31 से 05:37 रवि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:37 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:31 शनि से 05:37 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 12 अप्रैल को 07:31 पर, उस सूर्योदय (06:21) के बाद, लगती है और रवि 13 अप्रैल को 05:37 पर, अगले सूर्योदय (06:21 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 12 अप्रैल।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 12 अप्रैल को अरुणोदय (04:45–06:21) में दशमी है। रवि 13 अप्रैल को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:37 तक, फिर द्वादशी): रवि 13 अप्रैल।

व्रत का पारण

स्मार्त · रवि 13 अप्रैल, 10:58–18:05 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 13 अप्रैल 05:37 से सोम 14 अप्रैल 03:01 तक है; हरिवासर 10:58 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:05) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · सोम 14 अप्रैल, 06:21–18:04 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी सोम 14 अप्रैल को 03:01 पर, रात में, अरुणोदय (04:45) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:21) से सूर्यास्त (18:04) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।