Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 1993 शुक्र 2 अप्रैल या शनि 3 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में कामदा एकादशी 1993 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 2 अप्रैल
वैष्णव
शनिवार 3 अप्रैल
चैत्र शुक्ल एकादशी
Ipameri में शुक्र 2 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 3 अप्रैल
वैष्णव · रविवार 4 अप्रैल
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 2 अप्रैल
-
06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 3 अप्रैल
-
11:15–18:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 3 अप्रैल
-
06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 4 अप्रैल
-
06:19–18:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में कामदा एकादशी शुक्र 2 अप्रैल या शनि 3 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी शुक्र 2 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 3 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:53 से। एकादशी: 08:53 से 06:04 शनि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:04 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:53 शुक्र से 06:04 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 2 अप्रैल को 08:53 पर, उस सूर्योदय (06:19) के बाद, लगती है और शनि 3 अप्रैल को 06:04 पर, अगले सूर्योदय (06:19 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 2 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 2 अप्रैल को अरुणोदय (04:43–06:19) में दशमी है। शनि 3 अप्रैल को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 06:04 तक, फिर द्वादशी): शनि 3 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 3 अप्रैल, 11:15–18:12 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 3 अप्रैल 06:04 से रवि 4 अप्रैल 02:47 तक है; हरिवासर 11:15 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:12) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 4 अप्रैल, 06:19–18:11 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 4 अप्रैल को 02:47 पर, रात में, अरुणोदय (04:43) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:19) से सूर्यास्त (18:11) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।