tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 1952 पारण समय 08:50⁠–⁠18:10, रवि 6 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में कामदा एकादशी 1952 कब है?

शनिवार 5 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 5 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 6 अप्रैल

पारण समय
08:50–18:10
9 घं 20 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 5 अप्रैल
  • 06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 6 अप्रैल
  • 08:50–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में कामदा एकादशी शनि 5 अप्रैल को क्यों है?

कामदा एकादशी शनि 5 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:09 से 02:24 रवि तक।

एकादशी 02:24 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:09 शनि से 02:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 5 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:19: शनि 5 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:09 पर, उससे (04:43–06:19) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 6 अप्रैल, 08:50–18:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 अप्रैल 02:24 से सोम 7 अप्रैल 04:10 तक है; हरिवासर 08:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।