Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 1950 बुध 29 मार्च या गुरु 30 मार्च
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में कामदा एकादशी 1950 कब है?
स्मार्त
बुधवार 29 मार्च
वैष्णव
गुरुवार 30 मार्च
चैत्र शुक्ल एकादशी
Ipameri में बुध 29 मार्च का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 30 मार्च
वैष्णव · शुक्रवार 31 मार्च
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 29 मार्च
-
07:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 30 मार्च
-
11:07–19:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 30 मार्च
-
07:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 31 मार्च
-
07:18–19:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में कामदा एकादशी बुध 29 मार्च या गुरु 30 मार्च को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी बुध 29 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 30 मार्च को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:44 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:44 से 05:35 गुरु तक।
एकादशी 05:35 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:44 बुध से 05:35 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 29 मार्च को सूर्योदय पर है, 07:18: बुध 29 मार्च।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 29 मार्च को दशमी 06:44 तक है, अरुणोदय (05:42–07:18) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:35 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 30 मार्च को व्रत रखते हैं: गुरु 30 मार्च।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 30 मार्च, 11:07–19:15 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 30 मार्च 05:35 से शुक्र 31 मार्च 03:42 तक है; हरिवासर 11:07 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:15) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 31 मार्च, 07:18–19:15 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 31 मार्च को 03:42 पर, रात में, अरुणोदय (05:42) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (07:18) से सूर्यास्त (19:15) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।