Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 1937 मंगल 20 अप्रैल या बुध 21 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में कामदा एकादशी 1937 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 20 अप्रैल
वैष्णव
बुधवार 21 अप्रैल
चैत्र शुक्ल एकादशी
Ipameri में मंगल 20 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 21 अप्रैल
वैष्णव · गुरुवार 22 अप्रैल
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 20 अप्रैल
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06:23व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 21 अप्रैल
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11:53–17:59पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 21 अप्रैल
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06:23व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 22 अप्रैल
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06:23–06:44पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में कामदा एकादशी मंगल 20 अप्रैल या बुध 21 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी मंगल 20 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 21 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:55 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:55 से 05:36 बुध तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:36 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:55 मंगल से 05:36 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 20 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:23: मंगल 20 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 20 अप्रैल को दशमी 04:55 तक है, अरुणोदय (04:47–06:23) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:36 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 21 अप्रैल को व्रत रखते हैं: बुध 21 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 21 अप्रैल, 11:53–17:59 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 21 अप्रैल 05:36 से गुरु 22 अप्रैल 06:44 तक है; हरिवासर 11:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:59) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · गुरु 22 अप्रैल, 06:23–06:44
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 21 अप्रैल 05:36 से गुरु 22 अप्रैल 06:44 तक है; हरिवासर 11:53 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 22 अप्रैल को सूर्योदय (06:23) से होता है।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।