Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 1912 गुरु 28 मार्च या शुक्र 29 मार्च
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में कामदा एकादशी 1912 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 28 मार्च
वैष्णव
शुक्रवार 29 मार्च
चैत्र शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 28 मार्च का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 29 मार्च
वैष्णव · शनिवार 30 मार्च
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 28 मार्च
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06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 29 मार्च
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09:01–18:16पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 29 मार्च
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06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 30 मार्च
-
06:18–18:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में कामदा एकादशी गुरु 28 मार्च या शुक्र 29 मार्च को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी गुरु 28 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 29 मार्च को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:02 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:02 से 03:31 शुक्र तक।
एकादशी 03:31 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:02 गुरु से 03:31 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 28 मार्च को सूर्योदय पर है, 06:11: गुरु 28 मार्च।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 28 मार्च को दशमी 06:02 तक है, अरुणोदय (04:35–06:11) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:31 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 29 मार्च को व्रत रखते हैं: शुक्र 29 मार्च।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 29 मार्च, 09:01–18:16 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 29 मार्च 03:31 से शनि 30 मार्च 01:03 तक है; हरिवासर 08:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:35 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 30 मार्च, 06:18–18:15 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 30 मार्च को 01:03 पर, रात में, अरुणोदय (04:36) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:12) से सूर्यास्त (18:09) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।