Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में कामदा एकादशी 1903 मंगल 7 अप्रैल या बुध 8 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में कामदा एकादशी 1903 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 7 अप्रैल
वैष्णव
बुधवार 8 अप्रैल
चैत्र शुक्ल एकादशी
Ipameri में मंगल 7 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 8 अप्रैल
वैष्णव · गुरुवार 9 अप्रैल
कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 7 अप्रैल
-
06:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 8 अप्रैल
-
08:40–18:09पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 8 अप्रैल
-
06:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 9 अप्रैल
-
06:20–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में कामदा एकादशी मंगल 7 अप्रैल या बुध 8 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में कामदा एकादशी मंगल 7 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 8 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:09 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:09 से 03:03 बुध तक।
एकादशी 03:03 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:09 मंगल से 03:03 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 7 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:13: मंगल 7 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 7 अप्रैल को दशमी 05:09 तक है, अरुणोदय (04:37–06:13) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:03 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 8 अप्रैल को व्रत रखते हैं: बुध 8 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 8 अप्रैल, 08:40–18:09 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 8 अप्रैल 03:03 से गुरु 9 अप्रैल 01:07 तक है; हरिवासर 08:34 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:02) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:35 तक, करते हैं।
वैष्णव · गुरु 9 अप्रैल, 06:20–18:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 9 अप्रैल को 01:07 पर, रात में, अरुणोदय (04:37) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:13) से सूर्यास्त (18:02) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
चैत्र शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।