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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 2084 पारण समय 06:08⁠–⁠09:40, शुक्र 18 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 2084 कब है?

गुरुवार 17 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 17 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 18 फ़रवरी

पारण समय
06:08–09:40
3 घं 32 मि

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 17 फ़रवरी
  • 06:07व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 18 फ़रवरी
  • 06:08–09:40पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी गुरु 17 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी गुरु 17 फ़रवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 04:47 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:47 से 07:22 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:47 बुध से 07:22 तक।

द्वादशी: 07:22 गुरु से 09:40 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 16 फ़रवरी को 06:07 और गुरु 17 फ़रवरी को 06:07। एकादशी (बुध 16 फ़रवरी 04:47 से गुरु 17 फ़रवरी 07:22 तक) और द्वादशी (गुरु 17 फ़रवरी 07:22 से शुक्र 18 फ़रवरी 09:40 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 17 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 16 फ़रवरी को दशमी 04:47 तक है, उसके भीतर (04:31–06:07); गुरु 17 फ़रवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 18 फ़रवरी, 06:08–09:40

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 17 फ़रवरी 07:22 से शुक्र 18 फ़रवरी 09:40 तक है; हरिवासर 13:57 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 18 फ़रवरी को सूर्योदय (06:08) से होता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।