Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 2079 शनि 11 फ़रवरी या रवि 12 फ़रवरी
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में जया एकादशी 2079 कब है?
स्मार्त
शनिवार 11 फ़रवरी
वैष्णव
रविवार 12 फ़रवरी
माघ शुक्ल एकादशी
Ipameri में शनि 11 फ़रवरी का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 12 फ़रवरी
वैष्णव · सोमवार 13 फ़रवरी
जया एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 11 फ़रवरी
-
06:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 12 फ़रवरी
-
10:04–18:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 12 फ़रवरी
-
06:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 13 फ़रवरी
-
06:06–18:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में जया एकादशी शनि 11 फ़रवरी या रवि 12 फ़रवरी को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में जया एकादशी शनि 11 फ़रवरी को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 12 फ़रवरी को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:55 से। एकादशी: 06:55 से 04:38 रवि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 04:38 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:55 शनि से 04:38 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 11 फ़रवरी को 06:55 पर, उस सूर्योदय (06:05) के बाद, लगती है और रवि 12 फ़रवरी को 04:38 पर, अगले सूर्योदय (06:05 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 11 फ़रवरी।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 11 फ़रवरी को अरुणोदय (04:29–06:05) में दशमी है। रवि 12 फ़रवरी को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:38 तक, फिर द्वादशी): रवि 12 फ़रवरी।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 12 फ़रवरी, 10:04–18:47 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 12 फ़रवरी 04:38 से सोम 13 फ़रवरी 02:22 तक है; हरिवासर 10:04 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:38 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 13 फ़रवरी, 06:06–18:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 13 फ़रवरी को 02:22 पर, रात में, अरुणोदय (04:30) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:06) से सूर्यास्त (18:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
माघ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।